धान की फसल में NPK 11:11:8 जिंक और बोरॉन वाला उर्वरक डालने के बाद पौधों में पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद रहती है। लेकिन इसे डालने के बाद तुरंत दोबारा खाद डालना सही नहीं होता। फसल की अवस्था, खेत की स्थिति और पहले दी गई खाद के आधार पर अगला कदम तय करना जरूरी है।
NPK 11:11:8 ZB में क्या होता है
NPK 11:11:8 ZB एक संतुलित पोषक मिश्रण है, जिसमें नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश के साथ जिंक और बोरॉन भी होते हैं। उपलब्ध उत्पाद विनिर्देशों में इस ग्रेड में 11 प्रतिशत नाइट्रोजन, 11 प्रतिशत जल में घुलनशील फास्फोरस और 8 प्रतिशत पोटाश बताया गया है, जबकि जिंक और बोरॉन भी सूक्ष्म पोषक तत्व के रूप में शामिल हैं।
धान में नाइट्रोजन मुख्य रूप से पौधे की हरियाली और बढ़वार से जुड़ा है, फास्फोरस जड़ एवं शुरुआती विकास में महत्वपूर्ण है और पोटाश पौधे की मजबूती तथा पोषक तत्वों के संतुलन में भूमिका निभाता है। जिंक की कमी होने पर धान में सामान्य बढ़वार प्रभावित हो सकती है। इसलिए जिंक युक्त खाद का इस्तेमाल खासकर कमी वाले खेत में उपयोगी हो सकता है।
हालांकि, NPK 11:11:8 ZB को डाल देने का मतलब यह नहीं है कि धान की पूरी खाद की जरूरत पूरी हो गई। धान में नाइट्रोजन की जरूरत फसल की अवस्था के अनुसार कई बार अलग-अलग मात्रा में देने की सिफारिश की जाती है।
खाद डालने के बाद धान में क्या बदलाव देख सकते हैं
खाद डालने के बाद पौधों में बदलाव एकदम से दिखाई देना जरूरी नहीं है। खेत में नमी, मिट्टी का प्रकार, फसल की उम्र और पहले से मौजूद पोषक तत्वों की मात्रा के अनुसार प्रतिक्रिया अलग हो सकती है।
यदि खेत में किसी पोषक तत्व की कमी थी और खाद उचित मात्रा में दी गई है, तो आने वाले समय में पौधों की बढ़वार में सुधार दिखाई दे सकता है। पत्तियों का रंग, नई पत्तियों की वृद्धि और कल्ले निकलने की स्थिति को ध्यान से देखना चाहिए।
लेकिन केवल पौधे का हरा होना ही अच्छी फसल का प्रमाण नहीं है। जरूरत से ज्यादा नाइट्रोजन देने पर भी फसल बहुत हरी और नरम दिखाई दे सकती है, जबकि आगे चलकर फसल की मजबूती और रोग या कीट की स्थिति प्रभावित हो सकती है।
अब तुरंत क्या करना चाहिए
NPK 11:11:8 ZB डालने के बाद सबसे पहले खेत की वर्तमान अवस्था देखें। खाद की मात्रा बढ़ाने की जल्दबाजी करने के बजाय यह पता करना जरूरी है कि फसल अभी किस अवस्था में है और पहले कितनी नाइट्रोजन, फास्फोरस तथा पोटाश दी जा चुकी है।
धान में सामान्य पोषक प्रबंधन में नाइट्रोजन को एक ही बार देने के बजाय अलग-अलग चरणों में देने की व्यवस्था की जाती है। ICAR के धान संबंधी मार्गदर्शन में भी रोपाई के बाद नाइट्रोजन की टॉप ड्रेसिंग तथा बाद के चरण में शेष नाइट्रोजन और पोटाश देने की व्यवस्था बताई गई है। खाद डालने से पहले खेत में अतिरिक्त पानी निकालना भी उपयोगी बताया गया है।
इसलिए NPK 11:11:8 ZB डालने के तुरंत बाद फिर से कोई दूसरी खाद डालने के बजाय कुछ समय फसल की प्रतिक्रिया और उसकी अवस्था के अनुसार अगला पोषण प्रबंधन तय करना बेहतर रहेगा।
अगली खाद का फैसला कैसे करें
अगली खाद का निर्णय केवल NPK 11:11:8 ZB डालने के आधार पर नहीं किया जा सकता। इसके लिए यह देखना जरूरी है कि यह खाद फसल की किस अवस्था में और कितनी मात्रा में दी गई थी। अलग-अलग क्षेत्रों और परिस्थितियों में धान की अनुशंसित NPK मात्रा भी अलग हो सकती है।
खासकर नाइट्रोजन की अगली मात्रा तय करते समय खेत में पहले से दी गई यूरिया या दूसरी नाइट्रोजन वाली खाद को भी हिसाब में रखना चाहिए। बिना हिसाब के बार-बार खाद डालने से पोषक तत्वों का असंतुलन हो सकता है।
- पहले यह देखें कि धान अभी कल्ले निकलने की अवस्था में है या आगे बढ़ चुका है।
- अब तक दी गई यूरिया और दूसरी NPK खाद की कुल मात्रा का हिसाब रखें।
- खेत में पौधों का रंग, बढ़वार और कल्लों की संख्या देखकर अगली जरूरत का आकलन करें।
- संभव हो तो मिट्टी की जांच या स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सिफारिश के आधार पर अगली मात्रा तय करें।
अगर धान बहुत ज्यादा हरा हो गया है तो क्या करें
यदि NPK 11:11:8 ZB डालने के बाद धान बहुत तेजी से हरा और घना दिखाई देने लगा है, तो तुरंत उसके ऊपर अतिरिक्त नाइट्रोजन डालने की जरूरत नहीं मानी जानी चाहिए। पहले फसल की बढ़वार और खेत की स्थिति को देखें।
धान में नाइट्रोजन की आवश्यकता फसल की अवस्था के अनुसार बदलती है। वैज्ञानिक पोषक प्रबंधन में नाइट्रोजन को विभाजित मात्रा में देने पर जोर दिया जाता है, ताकि फसल को जरूरत के समय पोषण मिले और एक साथ अत्यधिक मात्रा देने से बचा जा सके।
यदि पौधे पहले से पर्याप्त हरे हैं, तो केवल रंग देखकर यूरिया डालना उचित नहीं है। दूसरी ओर, यदि फसल कमजोर है या नाइट्रोजन की कमी के स्पष्ट संकेत दिखाई दे रहे हैं, तो अगली खाद की मात्रा स्थानीय अनुशंसा और फसल की अवस्था के अनुसार तय करनी चाहिए।
पानी और खेत की स्थिति पर भी दें ध्यान
खाद डालने के बाद केवल खाद पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। धान के खेत में पानी की स्थिति भी पोषक तत्वों के उपयोग को प्रभावित करती है। बहुत अधिक पानी जमा रहने या खेत की स्थिति खराब होने पर खाद का लाभ अपेक्षित रूप से नहीं मिल सकता।
धान की पोषक प्रबंधन संबंधी सिफारिशों में टॉप ड्रेसिंग से पहले खेत से अतिरिक्त पानी निकालने का उल्लेख मिलता है। इसलिए खाद डालने के बाद खेत को लगातार बहुत अधिक पानी में डुबोकर रखने के बजाय स्थानीय सिंचाई प्रबंधन और फसल की अवस्था के अनुसार पानी नियंत्रित करना जरूरी है।
साथ ही, अगर पत्तियों में असामान्य पीलापन, धब्बे, सूखने के लक्षण या अचानक बढ़वार रुकने जैसी समस्या दिखाई देती है, तो इसे केवल खाद की कमी मानकर दूसरी खाद नहीं डालनी चाहिए। ऐसी स्थिति में कीट, रोग, पानी और अन्य पोषक तत्वों की कमी भी कारण हो सकती है।
आगे की फसल के लिए सबसे जरूरी बात
NPK 11:11:8 ZB डालने के बाद अगला कदम एक तय मात्रा में फिर से खाद डालना नहीं, बल्कि फसल की अवस्था देखकर पोषण प्रबंधन करना है। धान में फास्फोरस और पोटाश की पूरी जरूरत, नाइट्रोजन की कुल जरूरत और सूक्ष्म पोषक तत्वों की आवश्यकता एक ही उत्पाद से हर खेत में पूरी नहीं होती।
मिट्टी की जांच के आधार पर खाद देना सबसे बेहतर तरीका है। अलग-अलग क्षेत्रों में धान की किस्म, मिट्टी, सिंचाई व्यवस्था और खेती की पद्धति के कारण पोषक तत्वों की जरूरत बदल सकती है। इसलिए पहले से दी गई खाद का हिसाब रखना भी उतना ही जरूरी है जितना अगली खाद का चुनाव।
निष्कर्ष
धान में NPK 11:11:8 ZB डालने के बाद सबसे बड़ी गलती जल्दबाजी में फिर से यूरिया या दूसरी खाद डालना हो सकती है। पहले फसल की अवस्था, पौधों का रंग, कल्ले निकलने की स्थिति, खेत की नमी और अब तक दी गई खाद का पूरा हिसाब देखें।
यदि फसल सामान्य बढ़वार पर है, तो अगली खाद फसल की जरूरत और अनुशंसित पोषक प्रबंधन के अनुसार ही दें। अगर आप NPK 11:11:8 ZB की सही मात्रा, धान की उम्र और अब तक डाली गई खाद का हिसाब रखते हैं, तो उसी आधार पर आगे की खाद की जरूरत कहीं अधिक सही तरीके से तय की जा सकती है।


