मूंगफली की अच्छी पैदावार के लिए केवल एक खाद पर निर्भर रहना सही तरीका नहीं है। फसल को उसकी जरूरत के अनुसार नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश के साथ कैल्शियम और सल्फर जैसे पोषक तत्व भी चाहिए। खासकर फलियां बनने और दाना भरने के समय संतुलित पोषण का महत्व बढ़ जाता है।
मूंगफली में डबल पैदावार वाली खाद का सच क्या है
मूंगफली में ऐसी कोई एक चमत्कारी खाद नहीं है जिसे डालते ही हर खेत में पैदावार दोगुनी हो जाए। पैदावार मिट्टी की उर्वरता, किस्म, मौसम, सिंचाई, पौधों की संख्या, पोषक तत्वों की उपलब्धता और रोग-कीट प्रबंधन जैसे कई कारकों पर निर्भर करती है। इसलिए डबल पैदावार के दावे को एक निश्चित परिणाम मानना सही नहीं होगा।
मूंगफली में संतुलित पोषण सबसे महत्वपूर्ण बात है। हाल के कृषि परामर्श में भी मिट्टी की स्थिति के अनुसार उर्वरक देने और संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन पर जोर दिया गया है। इसका मतलब यह है कि किसान को केवल यूरिया या किसी एक खाद की मात्रा बढ़ाने के बजाय मिट्टी की जरूरत के अनुसार पोषण देना चाहिए।
मूंगफली में कौन-कौन से पोषक तत्व जरूरी हैं
मूंगफली की फसल को सामान्य तौर पर नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश की जरूरत होती है। इसके अलावा कैल्शियम और सल्फर भी मूंगफली के लिए महत्वपूर्ण हैं। इन पोषक तत्वों की वास्तविक जरूरत खेत की मिट्टी और स्थानीय कृषि सिफारिश के अनुसार अलग हो सकती है।
फसल में पोषक तत्वों की कमी होने पर पौधों की बढ़वार और फलियों के विकास पर असर पड़ सकता है। इसलिए बिना जरूरत एक ही खाद बार-बार डालने के बजाय मिट्टी की जांच के आधार पर खाद की योजना बनाना ज्यादा सुरक्षित और उपयोगी तरीका है।
जिप्सम मूंगफली में क्यों महत्वपूर्ण माना जाता है
मूंगफली में जिप्सम का इस्तेमाल कई कृषि पैकेजों में किया जाता है क्योंकि यह कैल्शियम और सल्फर उपलब्ध कराने का एक स्रोत है। कैल्शियम फलियों और दानों के विकास से जुड़ा महत्वपूर्ण पोषक तत्व है। हालांकि जिप्सम की मात्रा हर खेत के लिए एक जैसी नहीं रखी जा सकती।
एक कृषि विज्ञान केंद्र के प्रदर्शन पैकेज में TAG-24 मूंगफली के लिए बुवाई के लगभग 30 दिन बाद 500 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर जिप्सम देने की सिफारिश दर्ज है। यह एक विशिष्ट क्षेत्र और पैकेज की सिफारिश है, इसलिए इसे हर किसान के खेत में बिना स्थानीय सिफारिश या मिट्टी की स्थिति जाने समान मात्रा में लागू नहीं करना चाहिए।
मूंगफली में खाद कब और कैसे दें
मूंगफली में खाद डालने का समय भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना खाद का चुनाव। बुवाई के समय दी जाने वाली बेसल खाद और बाद की अवस्था में दी जाने वाली पोषक तत्वों की जरूरत अलग हो सकती है। खेत की मिट्टी में पहले से मौजूद पोषक तत्वों के आधार पर मात्रा तय करना सबसे बेहतर रहता है।
यदि जिप्सम की जरूरत हो तो उसे फसल की अनुशंसित अवस्था पर खेत में समान रूप से देना चाहिए। कुछ कृषि पैकेजों में इसे बुवाई के करीब 30 दिन बाद देने की सलाह दी गई है। वहीं किसी दूसरे क्षेत्र में मिट्टी और फसल प्रबंधन के अनुसार अलग सिफारिश हो सकती है।
किसान को खाद को पौधों की जड़ों के आसपास जरूरत से ज्यादा मात्रा में एक जगह इकट्ठा करने से बचना चाहिए। खाद का उपयोग स्थानीय कृषि विभाग या कृषि विज्ञान केंद्र की अनुशंसा के अनुसार करना ज्यादा उचित है।
मूंगफली की पैदावार बढ़ाने के लिए इन बातों पर दें ध्यान
केवल खाद डालने से मूंगफली की पैदावार में बड़ा बदलाव नहीं आता। अच्छी किस्म, स्वस्थ बीज, उचित पौध संख्या, सही नमी और समय पर फसल प्रबंधन भी जरूरी है। कृषि परामर्श में बेहतर किस्मों के चयन और बीज उपचार के साथ संतुलित पोषण पर भी जोर दिया गया है।
- मिट्टी की जांच के आधार पर नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश की मात्रा तय करें।
- कैल्शियम और सल्फर की जरूरत होने पर जिप्सम जैसे उपयुक्त स्रोत का इस्तेमाल स्थानीय सिफारिश के अनुसार करें।
- बुवाई के लिए क्षेत्र के अनुकूल और प्रमाणित किस्म का स्वस्थ बीज चुनें।
- फसल में नमी की कमी और रोग-कीट की समस्या को समय रहते नियंत्रित करें।
ज्यादा खाद डालना भी हो सकता है नुकसानदायक
कई किसान अधिक पैदावार की उम्मीद में खाद की मात्रा बढ़ा देते हैं, लेकिन ज्यादा खाद हमेशा ज्यादा उत्पादन नहीं देती। जरूरत से अधिक उर्वरक लगाने से लागत बढ़ सकती है और पोषक तत्वों का संतुलन बिगड़ सकता है। कृषि वैज्ञानिक भी मिट्टी परीक्षण और संतुलित उर्वरक उपयोग पर जोर दे रहे हैं।
इसलिए मूंगफली में खाद का चुनाव खेत की वास्तविक स्थिति देखकर करना चाहिए। यदि मिट्टी में किसी पोषक तत्व की कमी नहीं है तो उसकी अतिरिक्त मात्रा डालने से अपेक्षित लाभ मिलना जरूरी नहीं है। दूसरी तरफ जिस पोषक तत्व की कमी है, उसे सही स्रोत और सही समय पर उपलब्ध कराने से फसल की स्थिति बेहतर हो सकती है।
मूंगफली में अच्छी पैदावार के लिए सही रणनीति क्या है
मूंगफली में किसी एक खाद को चमत्कारी मानने के बजाय संतुलित पोषण की पूरी योजना बनाना ज्यादा प्रभावी तरीका है। खेत की मिट्टी की जांच कराकर यह पता करना चाहिए कि उसमें कौन से पोषक तत्व कम हैं। इसके बाद स्थानीय अनुशंसा के अनुसार बेसल खाद, जिप्सम या अन्य पोषक तत्वों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
अच्छी पैदावार के लिए केवल खाद ही नहीं, बल्कि उपयुक्त किस्म, सही समय पर बुवाई, पर्याप्त नमी, खरपतवार नियंत्रण और रोग-कीट प्रबंधन पर भी ध्यान देना जरूरी है। ICAR के मूंगफली संबंधी कृषि परामर्श में भी पोषण प्रबंधन के साथ बीज और फसल प्रबंधन को महत्व दिया गया है।
निष्कर्ष
मूंगफली में डबल पैदावार के नाम पर किसी एक खाद को चमत्कारी मानना सही नहीं है। वास्तविक फायदा तब मिलता है जब खेत की मिट्टी की जरूरत के अनुसार संतुलित पोषक तत्व दिए जाएं और फसल की हर अवस्था में उचित प्रबंधन किया जाए। जिप्सम कुछ परिस्थितियों में मूंगफली के लिए उपयोगी पोषक स्रोत हो सकता है, लेकिन इसकी मात्रा और प्रयोग का समय क्षेत्र तथा मिट्टी की स्थिति के अनुसार तय होना चाहिए।
इसलिए किसान बिना जांच के खाद की मात्रा बढ़ाने के बजाय मिट्टी परीक्षण और स्थानीय कृषि सिफारिश को आधार बनाएं। सही किस्म, संतुलित खाद, पर्याप्त नमी और समय पर फसल प्रबंधन को एक साथ अपनाने से मूंगफली की उत्पादकता और खेती की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने की संभावना अधिक रहती है।


