फसल या सब्जियों के पौधों की शुरुआती बढ़वार कमजोर हो तो किसान अक्सर DAP का इस्तेमाल बढ़ा देते हैं। लेकिन केवल DAP की मात्रा बढ़ाने से हर पौधा तेजी से बढ़े, यह जरूरी नहीं है। पौधे की सही बढ़वार के लिए पोषक तत्वों का संतुलन, मिट्टी की स्थिति और फसल की जरूरत समझना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
ऐसे में DAP के साथ जिस एक चीज की चर्चा होती है, वह है जिंक। हालांकि इसे हर खेत में बिना जांच के डालना सही नहीं है। जिंक की कमी होने पर इसकी पूर्ति पौधे की वृद्धि और पोषक तत्वों के बेहतर उपयोग में मदद कर सकती है।
DAP पौधे को आखिर देता क्या है?
DAP यानी डाय-अमोनियम फॉस्फेट एक प्रमुख रासायनिक उर्वरक है, जिसमें नाइट्रोजन और फास्फोरस दोनों होते हैं। इसका उपयोग मुख्य रूप से फसल की पोषक तत्वों की जरूरत पूरी करने के लिए किया जाता है। फास्फोरस जड़ों के विकास और पौधे की शुरुआती वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण पोषक तत्व है, जबकि नाइट्रोजन पौधे की हरी बढ़वार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
लेकिन यहां एक जरूरी बात समझना चाहिए। DAP में पोटाश नहीं होता। इसलिए यदि मिट्टी या फसल को पोटाश या किसी दूसरे पोषक तत्व की जरूरत है, तो केवल DAP देने से पोषण संतुलित नहीं हो जाता।
इसी वजह से कृषि विशेषज्ञ लगातार संतुलित और मिट्टी की जांच के आधार पर उर्वरक इस्तेमाल करने पर जोर देते हैं। जरूरत से ज्यादा DAP या यूरिया डालना पौधे के लिए हमेशा फायदेमंद नहीं होता।
DAP के साथ जिंक कब बन सकता है खास?
जिंक पौधों के लिए आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व है। इसकी कमी होने पर पौधे की सामान्य वृद्धि प्रभावित हो सकती है और पत्तियों में कमी के लक्षण दिखाई दे सकते हैं। खासकर उन खेतों में जहां जिंक की कमी है, वहां उचित मात्रा में जिंक की पूर्ति उपयोगी हो सकती है।
लेकिन जिंक को DAP के साथ हर फसल में अनिवार्य रूप से डालना सही तरीका नहीं है। पहले यह देखना जरूरी है कि खेत में वास्तव में जिंक की कमी है या नहीं। मिट्टी की जांच और फसल की स्थिति के आधार पर इसका फैसला करना अधिक सुरक्षित और वैज्ञानिक तरीका है।
कुछ फसलों के लिए कृषि सलाह में जिंक सल्फेट को मिट्टी में देने या आवश्यकता के अनुसार पत्तियों पर घोल के रूप में देने की सिफारिश भी की जाती है। इसका मतलब यह है कि जिंक का फायदा उसकी सही मात्रा और सही समय पर निर्भर करता है।
पौधा तेजी से बढ़ाने के लिए केवल खाद पर निर्भर न रहें
पौधे की बढ़वार कई चीजों पर निर्भर करती है। पर्याप्त पोषण मिलने के साथ-साथ जड़ों को हवा, उचित नमी और अनुकूल मिट्टी की स्थिति भी चाहिए। अगर जड़ क्षेत्र में लगातार पानी भरा है, मिट्टी बहुत कड़ी है या पौधे को पानी की कमी है, तो केवल खाद डालने से अपेक्षित बढ़वार नहीं मिलेगी।
इसी तरह किसी एक पोषक तत्व की कमी को दूसरे पोषक तत्व की ज्यादा मात्रा देकर ठीक नहीं किया जा सकता। उदाहरण के लिए, अगर समस्या जिंक की कमी की है तो केवल DAP बढ़ाते जाना समाधान नहीं है।
इसलिए खाद डालने से पहले किसान को इन बातों पर ध्यान देना चाहिए:
- मिट्टी में किस पोषक तत्व की कमी है, इसकी जानकारी लें।
- फसल और उसकी अवस्था के अनुसार उर्वरक की मात्रा तय करें।
- जिंक की कमी होने पर ही उपयुक्त जिंक उर्वरक का इस्तेमाल करें।
- खाद के साथ खेत में नमी और जल निकास की स्थिति भी ठीक रखें।
ज्यादा DAP डालना क्यों सही नहीं?
कई बार पौधे की कमजोर बढ़वार देखकर किसान DAP की मात्रा बढ़ा देते हैं। यह तरीका हमेशा सही नहीं है। वैज्ञानिक कृषि सलाह में जरूरत से अधिक DAP के इस्तेमाल से बचने और मिट्टी की जांच के आधार पर संतुलित उर्वरक प्रबंधन करने पर जोर दिया गया है।
DAP में मौजूद पोषक तत्व तभी प्रभावी ढंग से काम करेंगे जब पौधे की कुल पोषण जरूरत संतुलित हो। किसी एक खाद का लगातार ज्यादा इस्तेमाल मिट्टी के पोषक संतुलन को बिगाड़ सकता है और अनावश्यक खर्च भी बढ़ा सकता है।
इसलिए “DAP ज्यादा यानी पौधा ज्यादा तेज” वाला सीधा नियम नहीं है। पौधे की वास्तविक जरूरत के हिसाब से पोषण देना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
सही तरीका क्या होना चाहिए?
अगर पौधे की बढ़वार कमजोर है तो सबसे पहले कारण पता करना चाहिए। केवल खाद डालने से पहले यह देखना जरूरी है कि पौधे में पोषक तत्वों की कमी है, पानी की समस्या है, जड़ों में परेशानी है या कोई कीट या रोग पौधे की वृद्धि रोक रहा है।
मिट्टी की जांच उपलब्ध होने पर उसके परिणाम के आधार पर खाद की योजना बनाना बेहतर रहता है। जिंक की कमी मिलने पर कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार जिंक सल्फेट या उपयुक्त जिंक उत्पाद का इस्तेमाल किया जा सकता है।
फसल के अनुसार खाद की जरूरत भी बदलती है। इसलिए एक ही मिश्रण या एक ही मात्रा को सभी सब्जियों और फसलों पर लागू करना वैज्ञानिक तरीका नहीं है।
निष्कर्ष
DAP पौधों के लिए महत्वपूर्ण पोषक तत्व उपलब्ध करा सकता है, लेकिन इसे किसी जादुई खाद की तरह इस्तेमाल करना सही नहीं है। यदि मिट्टी में जिंक की कमी है, तो DAP के साथ उचित जिंक प्रबंधन पौधे की पोषण स्थिति और बढ़वार को बेहतर करने में मदद कर सकता है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 100 प्रतिशत गारंटी वाला कोई एक खाद मिश्रण हर खेत और हर पौधे पर समान परिणाम नहीं देता। तेज और स्वस्थ बढ़वार के लिए मिट्टी की जांच, फसल की जरूरत, संतुलित पोषण, सही सिंचाई और उचित कृषि प्रबंधन को साथ लेकर चलना जरूरी है। यही तरीका पौधे को मजबूत बनाने के साथ किसान की खाद लागत को भी अनावश्यक रूप से बढ़ने से रोक सकता है।


