अगर आप नया छोटा व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, तो प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम यानी PMEGP के तहत बैंक ऋण और सरकारी Margin Money Subsidy का लाभ मिल सकता है। यह योजना नए माइक्रो एंटरप्राइज स्थापित करने के लिए बनाई गई है और आवेदन ऑनलाइन किया जा सकता है।
PMEGP में सरकार सीधे पूरा प्रोजेक्ट खर्च नहीं देती। लाभार्थी को अपना निर्धारित योगदान देना होता है और बाकी प्रोजेक्ट लागत का वित्तपोषण बैंक करता है। पात्रता और परियोजना के अनुसार सरकारी सब्सिडी भी उपलब्ध हो सकती है।
PMEGP लोन क्या है?
PMEGP यानी Prime Minister’s Employment Generation Programme केंद्र सरकार की credit-linked subsidy योजना है। इसका उद्देश्य नए स्वरोजगार उद्यम और माइक्रो एंटरप्राइज स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है।
मौजूदा दिशानिर्देशों के अनुसार नए प्रोजेक्ट के लिए Margin Money Subsidy की अधिकतम परियोजना लागत Manufacturing क्षेत्र में ₹50 लाख और Business/Service क्षेत्र में ₹20 लाख तक है। इससे अधिक परियोजना लागत होने पर अतिरिक्त राशि बैंक द्वारा बिना सरकारी सब्सिडी के वित्तपोषित की जा सकती है।
PMEGP में कितनी सब्सिडी मिलती है?
सब्सिडी की दर लाभार्थी की श्रेणी और प्रोजेक्ट के ग्रामीण या शहरी क्षेत्र में होने पर निर्भर करती है। सामान्य श्रेणी के लिए लाभार्थी का अपना योगदान 10 प्रतिशत है और Margin Money Subsidy शहरी क्षेत्र में 15 प्रतिशत तथा ग्रामीण क्षेत्र में 25 प्रतिशत है।
विशेष श्रेणी के लाभार्थियों के लिए अपना योगदान 5 प्रतिशत और सब्सिडी शहरी क्षेत्र में 25 प्रतिशत तथा ग्रामीण क्षेत्र में 35 प्रतिशत तक हो सकती है।
यह सब्सिडी सीधे हाथ में नकद मिलने वाली रकम नहीं होती। नियमों के अनुसार Margin Money को बैंक में निर्धारित अवधि के लिए रखा जाता है और शर्तें पूरी होने के बाद ऋण खाते में समायोजित किया जाता है।
PMEGP लोन की ब्याज दर कितनी है?
PMEGP में सभी बैंकों के लिए एक ही निश्चित ब्याज दर निर्धारित नहीं होती। बैंक द्वारा स्वीकृत ऋण पर लागू ब्याज दर संबंधित बैंक की नियमावली और ऋण की शर्तों के अनुसार तय होती है।
इसलिए PMEGP लोन के लिए आवेदन करते समय केवल सब्सिडी की दर देखना पर्याप्त नहीं है। बैंक से स्वीकृति मिलने पर sanction letter में लागू ब्याज दर, repayment period और अन्य ऋण शर्तों को ध्यान से देखना चाहिए।
PMEGP की बैंक प्रक्रिया में Rate of Interest को loan account की जानकारी के हिस्से के रूप में दर्ज किया जाता है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि ब्याज दर बैंक स्तर पर लागू ऋण शर्तों के अनुसार होती है।
PMEGP लोन के लिए कौन आवेदन कर सकता है?
नए PMEGP प्रोजेक्ट के लिए सामान्य रूप से 18 वर्ष से अधिक आयु का व्यक्ति आवेदन कर सकता है। योजना में नया उद्यम स्थापित करने के लिए आय की कोई सामान्य ceiling निर्धारित नहीं है।
कुछ अधिक लागत वाले प्रोजेक्ट के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता भी लागू होती है। मौजूदा दिशानिर्देशों के अनुसार Manufacturing में ₹10 लाख से अधिक और Business/Service में ₹5 लाख से अधिक लागत वाले नए प्रोजेक्ट के लिए आवेदक का कम से कम VIII पास होना आवश्यक है।
PMEGP के तहत सहायता नए प्रोजेक्ट के लिए होती है। पहले से चल रही इकाई को सामान्य नए-unit वाले PMEGP लाभ के लिए पात्र नहीं माना जाता, हालांकि मौजूदा पात्र PMEGP/REGP/MUDRA इकाइयों के upgradation के लिए अलग second-loan प्रावधान मौजूद है।
PMEGP लोन के लिए जरूरी दस्तावेज
आवेदन में मांगे जाने वाले दस्तावेज प्रोजेक्ट और आवेदक की स्थिति के अनुसार अलग हो सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन में Aadhaar संबंधी जानकारी और आवेदक का नाम दर्ज किया जाता है तथा आगे व्यवसाय और परियोजना से जुड़ी जानकारी मांगी जाती है।
आवेदन तैयार करते समय सामान्य रूप से इन दस्तावेजों और जानकारियों को तैयार रखना उपयोगी है:
- Aadhaar और PAN से संबंधित जानकारी।
- पासपोर्ट साइज फोटो और बैंक खाते से जुड़ी जानकारी।
- परियोजना रिपोर्ट और व्यवसाय से संबंधित विवरण।
- शैक्षणिक प्रमाणपत्र, जहां निर्धारित नियमों के अनुसार जरूरी हो।
बैंक या संबंधित implementing agency आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त दस्तावेज भी मांग सकती है। इसलिए केवल एक तय सूची देखकर आवेदन पूरा मानना सही नहीं है।
PMEGP लोन के लिए ऑनलाइन आवेदन कैसे करें?
PMEGP की ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया में पहले नए यूनिट के लिए आवेदन शुरू किया जाता है। Individual Applicant के लिए Aadhaar नंबर और Aadhaar के अनुसार नाम जैसी जानकारी दर्ज करने की व्यवस्था पोर्टल पर दी गई है।
इसके बाद आवेदक को व्यक्तिगत जानकारी, प्रस्तावित इकाई, परियोजना, बैंक और अन्य आवश्यक विवरण भरने होते हैं। आवेदन जमा होने के बाद संबंधित implementing agency और बैंक द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आगे की जांच और ऋण स्वीकृति की कार्रवाई होती है।
PMEGP पोर्टल पर New Unit के साथ Registered Applicant के लिए login और Existing Units के लिए second-loan आवेदन की अलग सुविधा भी उपलब्ध है।
लोन स्वीकृत होने के बाद क्या होता है?
बैंक द्वारा प्रोजेक्ट स्वीकृत होने के बाद लाभार्थी को निर्धारित अपना योगदान जमा करना पड़ सकता है। इसके अलावा PMEGP के नियमों के अनुसार EDP Training भी प्रक्रिया का हिस्सा है।
ऑनलाइन EDP Training उन पात्र आवेदकों के लिए उपलब्ध है जिनका PMEGP loan बैंक द्वारा sanctioned हो चुका है और जिन्होंने निर्धारित प्रशिक्षण पहले से नहीं लिया है। पोर्टल के अनुसार online EDP training की अवधि 15 दिन है और पात्र PMEGP beneficiaries के लिए यह training free of cost है।
इसके बाद बैंक अपनी स्वीकृत शर्तों के अनुसार ऋण राशि जारी करता है। Margin Money Subsidy बैंक के माध्यम से निर्धारित प्रक्रिया में रखी जाती है और नियमों के अनुसार बाद में ऋण खाते में समायोजित की जाती है।
PMEGP लोन लेते समय किन बातों का ध्यान रखें?
PMEGP आवेदन में गलत जानकारी देने या अधूरे दस्तावेज जमा करने से बैंक स्तर पर आवेदन में देरी या अस्वीकृति की समस्या हो सकती है। इसलिए परियोजना लागत, व्यवसाय की गतिविधि, अपना योगदान और बैंक संबंधी जानकारी वास्तविक रूप से भरनी चाहिए।
PMEGP पोर्टल पर यह भी चेतावनी दी गई है कि KVIC, KVIB, DIC और संबंधित संस्थाओं ने PMEGP प्रोजेक्ट को बढ़ावा देने या मंजूर कराने के लिए निजी एजेंट, बिचौलिये या फ्रेंचाइजी नियुक्त नहीं किए हैं। इसलिए किसी व्यक्ति को केवल PMEGP लोन मंजूर कराने के नाम पर पैसे देने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए।
PMEGP लोन नए माइक्रो बिजनेस और स्वरोजगार प्रोजेक्ट के लिए बैंक वित्त और सरकारी Margin Money Subsidy का अवसर देता है। नए प्रोजेक्ट के लिए सब्सिडी वाली अधिकतम परियोजना लागत Manufacturing में ₹50 लाख और Business/Service में ₹20 लाख तक है।
PMEGP की ब्याज दर कोई एक समान सरकारी प्रतिशत नहीं है, बल्कि स्वीकृत बैंक ऋण की शर्तों के अनुसार लागू होती है। आवेदन करने से पहले पात्रता, अपना योगदान, परियोजना रिपोर्ट, दस्तावेज, ब्याज दर और repayment conditions को अच्छी तरह समझना जरूरी है। इससे आवेदन करते समय गलत जानकारी और बाद में ऋण संबंधी परेशानी से बचा जा सकता है।